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सहीह बुख़ारी

नंबर 3857

नंबर 3857किताब 63, नंबर 82
حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ حَمَّادٍ الآمُلِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مُجَالِدٍ، عَنْ بَيَانٍ، عَنْ وَبَرَةَ، عَنْ هَمَّامِ بْنِ الْحَارِثِ، قَالَ قَالَ عَمَّارُ بْنُ يَاسِرٍ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَمَا مَعَهُ إِلاَّ خَمْسَةُ أَعْبُدٍ وَامْرَأَتَانِ، وَأَبُو بَكْرٍ‏.‏
Narrated `Ammar bin Yasir:I saw Allah's Messenger (ﷺ) , and the only converts (to Islam) with him, were five slaves, two women and Abu Bakr

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।