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सहीह बुख़ारी

नंबर 3849

नंबर 3849किताब 63, नंबर 74
حَدَّثَنَا نُعَيْمُ بْنُ حَمَّادٍ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ، قَالَ رَأَيْتُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ قِرْدَةً اجْتَمَعَ عَلَيْهَا قِرَدَةٌ قَدْ زَنَتْ، فَرَجَمُوهَا فَرَجَمْتُهَا مَعَهُمْ‏.‏
Narrated `Amr bin Maimun:During the pre-Islamic period of ignorance I saw a she-monkey surrounded by a number of monkeys. They were all stoning it, because it had committed illegal sexual intercourse. I too, stoned it along with them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।