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सहीह बुख़ारी

नंबर 3838

नंबर 3838किताब 63, नंबर 63
حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ عَبَّاسٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ، قَالَ قَالَ عُمَرُ ـ رضى الله عنه ـ إِنَّ الْمُشْرِكِينَ كَانُوا لاَ يُفِيضُونَ مِنْ جَمْعٍ حَتَّى تَشْرُقَ الشَّمْسُ عَلَى ثَبِيرٍ، فَخَالَفَهُمُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَأَفَاضَ قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ‏.‏
Narrated `Umar:The pagans used not to leave Jam' (i.e. Muzdalifa) till the sun had risen on Thabir mountain. The Prophet contradicted them by leaving (Muzdalifa) before the sun rose

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।