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सहीह बुख़ारी

नंबर 3833

नंबर 3833किताब 63, नंबर 58
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ كَانَ عَمْرٌو يَقُولُ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ جَاءَ سَيْلٌ فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَكَسَا مَا بَيْنَ الْجَبَلَيْنِ‏.‏ قَالَ سُفْيَانُ وَيَقُولُ إِنَّ هَذَا لَحَدِيثٌ لَهُ شَأْنٌ‏.‏
Narrated Sa`id bin Al-Musaiyab's grand-father:In the pre-Islamic period of ignorance a flood of rain came and filled the valley in between the two mountains (around the Ka`ba)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।