सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 3803

नंबर 3803किताब 63, नंबर 28
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا فَضْلُ بْنُ مُسَاوِرٍ، خَتَنُ أَبِي عَوَانَةَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ ـ رضى الله عنه ـ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ اهْتَزَّ الْعَرْشُ لِمَوْتِ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ ‏"‏‏.‏ وَعَنِ الأَعْمَشِ حَدَّثَنَا أَبُو صَالِحٍ عَنْ جَابِرٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِثْلَهُ‏.‏ فَقَالَ رَجُلٌ لِجَابِرٍ فَإِنَّ الْبَرَاءَ يَقُولُ اهْتَزَّ السَّرِيرُ‏.‏ فَقَالَ إِنَّهُ كَانَ بَيْنَ هَذَيْنِ الْحَيَّيْنِ ضَغَائِنُ، سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ اهْتَزَّ عَرْشُ الرَّحْمَنِ لِمَوْتِ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir:I heard the Prophet (ﷺ) saying, "The Throne (of Allah) shook at the death of Sa`d bin Mu`adh." Through another group of narrators, Jabir added, "I heard the Prophet (ﷺ) : saying, 'The Throne of the Beneficent shook because of the death of Sa`d bin Mu`adh

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।