حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَدِيُّ بْنُ ثَابِتٍ، قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَوْ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " الأَنْصَارُ لاَ يُحِبُّهُمْ إِلاَّ مُؤْمِنٌ، وَلاَ يُبْغِضُهُمْ إِلاَّ مُنَافِقٌ، فَمَنْ أَحَبَّهُمْ أَحَبَّهُ اللَّهُ، وَمَنْ أَبْغَضَهُمْ أَبْغَضَهُ اللَّهُ ".
Narrated Al-Bara:I heard the Prophet (ﷺ) saying (or the Prophet (ﷺ) said), "None loves the Ansar but a believer, and none hates them but a hypocrite. So Allah will love him who loves them, and He will hate him who hates them
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।