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सहीह बुख़ारी

नंबर 3763

नंबर 3763किताब 62, नंबर 108
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ يُوسُفَ بْنِ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ حَدَّثَنِي الأَسْوَدُ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا مُوسَى الأَشْعَرِيَّ ـ رضى الله عنه ـ يَقُولُ قَدِمْتُ أَنَا وَأَخِي مِنَ الْيَمَنِ، فَمَكُثْنَا حِينًا مَا نُرَى إِلاَّ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مَسْعُودٍ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ بَيْتِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، لِمَا نَرَى مِنْ دُخُولِهِ وَدُخُولِ أُمِّهِ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Abu Musa Al-Ash`ari:My brother and I came from Yemen, and for some time we continued to consider `Abdullah bin Mas`ud as one of the members of the family of the Prophet (ﷺ) because we used to see him and his mother going in the house of the Prophet (ﷺ) very often

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।