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सहीह बुख़ारी

नंबर 3736

नंबर 3736किताब 62, नंबर 83
وَقَالَ نُعَيْمٌ عَنِ ابْنِ الْمُبَارَكِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، أَخْبَرَنِي مَوْلًى، لأُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ‏.‏ أَنَّ الْحَجَّاجَ بْنَ أَيْمَنَ ابْنِ أُمِّ أَيْمَنَ،، وَكَانَ، أَيْمَنُ ابْنُ أُمِّ أَيْمَنَ أَخَا أُسَامَةَ لأُمِّهِ، وَهْوَ رَجُلٌ مِنَ الأَنْصَارِ، فَرَآهُ ابْنُ عُمَرَ لَمْ يُتِمَّ رُكُوعَهُ وَلاَ سُجُودَهُ فَقَالَ أَعِدْ‏.‏
The freed slave of Usama bin Zaid said, "Al-Hajjaj bin Aiman bin Um Aiman and Aiman Ibn Um Aiman was Usama's brother from the maternal side, and he was one of the Ansar. He was seen by Ibn 'Umar not performing his bowing and prostrations in a perfect manner. So Ibn 'Umar told him to repeat his prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।