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सहीह बुख़ारी

नंबर 3718

नंबर 3718किताब 62, नंबर 66
حَدَّثَنِي عُبَيْدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامٍ، أَخْبَرَنِي أَبِي، سَمِعْتُ مَرْوَانَ، كُنْتُ عِنْدَ عُثْمَانَ، أَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ اسْتَخْلِفْ‏.‏ قَالَ وَقِيلَ ذَاكَ قَالَ نَعَمْ، الزُّبَيْرُ‏.‏ قَالَ أَمَا وَاللَّهِ إِنَّكُمْ لَتَعْلَمُونَ أَنَّهُ خَيْرُكُمْ‏.‏ ثَلاَثًا‏.‏
Narrated Marwan bin Al-Hakam:While I was with `Uthman, a man came to him and said, "Appoint your successor." `Uthman said, "Has such successor been named?" He replied, "Yes, Az-Zubair." `Uthman said, thrice, "By Allah! Indeed you know that he is the best of you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।