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सहीह बुख़ारी

नंबर 3707

नंबर 3707किताब 62, नंबर 57
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْجَعْدِ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، عَنْ عَبِيدَةَ، عَنْ عَلِيٍّ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ اقْضُوا كَمَا كُنْتُمْ تَقْضُونَ، فَإِنِّي أَكْرَهُ الاِخْتِلاَفَ حَتَّى يَكُونَ لِلنَّاسِ جَمَاعَةٌ، أَوْ أَمُوتَ كَمَا مَاتَ أَصْحَابِي‏.‏ فَكَانَ ابْنُ سِيرِينَ يَرَى أَنَّ عَامَّةَ مَا يُرْوَى عَلَى عَلِيٍّ الْكَذِبُ‏.‏
Narrated Ubaida: Ali said (to the people of 'Iraq), "Judge as you used to judge, for I hate differences (and I do my best ) till the people unite as one group, or I die as my companions have died

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।