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सहीह बुख़ारी

नंबर 3681

नंबर 3681किताब 62, नंबर 31
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الصَّلْتِ أَبُو جَعْفَرٍ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي حَمْزَةُ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ بَيْنَا أَنَا نَائِمٌ شَرِبْتُ ـ يَعْنِي اللَّبَنَ ـ حَتَّى أَنْظُرُ إِلَى الرِّيِّ يَجْرِي فِي ظُفُرِي أَوْ فِي أَظْفَارِي، ثُمَّ نَاوَلْتُ عُمَرَ ‏"‏‏.‏ فَقَالُوا فَمَا أَوَّلْتَهُ قَالَ ‏"‏ الْعِلْمَ ‏"‏‏.‏
Narrated Hamza's father:Allah's Messenger (ﷺ) said, "While I was sleeping, I saw myself drinking (i.e. milk), and I was so contented that I saw the milk flowing through my nails. Then I gave (the milk) to `Umar." They (i.e. the companions of the Prophet) asked, "What do you interpret it?" He said, "Knowledge

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।