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सहीह बुख़ारी

नंबर 3662

नंबर 3662किताब 62, नंबर 14
حَدَّثَنَا مُعَلَّى بْنُ أَسَدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ الْمُخْتَارِ، قَالَ خَالِدٌ الْحَذَّاءُ حَدَّثَنَا عَنْ أَبِي عُثْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم بَعَثَهُ عَلَى جَيْشِ ذَاتِ السَّلاَسِلِ، فَأَتَيْتُهُ فَقُلْتُ أَىُّ النَّاسِ أَحَبُّ إِلَيْكَ قَالَ ‏"‏ عَائِشَةُ ‏"‏‏.‏ فَقُلْتُ مِنَ الرِّجَالِ فَقَالَ ‏"‏ أَبُوهَا ‏"‏‏.‏ قُلْتُ ثُمَّ مَنْ قَالَ ‏"‏ ثُمَّ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ ‏"‏‏.‏ فَعَدَّ رِجَالاً‏.‏
Narrated `Amr bin Al-As:The Prophet (ﷺ) deputed me to lead the Army of Dhat-as-Salasil. I came to him and said, "Who is the most beloved person to you?" He said, "`Aisha." I asked, "Among the men?" He said, "Her father." I said, "Who then?" He said, "Then `Umar bin Al-Khattab." He then named other men

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 62 · Companions of the Prophet

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।