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सहीह बुख़ारी

नंबर 3631

नंबर 3631किताब 61, नंबर 135
حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ عَبَّاسٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ هَلْ لَكُمْ مِنْ أَنْمَاطٍ ‏"‏‏.‏ قُلْتُ وَأَنَّى يَكُونُ لَنَا الأَنْمَاطُ قَالَ ‏"‏ أَمَا إِنَّهُ سَيَكُونُ لَكُمُ الأَنْمَاطُ ‏"‏‏.‏ فَأَنَا أَقُولُ لَهَا ـ يَعْنِي امْرَأَتَهُ ـ أَخِّرِي عَنِّي أَنْمَاطَكِ‏.‏ فَتَقُولُ أَلَمْ يَقُلِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنَّهَا سَتَكُونُ لَكُمُ الأَنْمَاطُ ‏"‏‏.‏ فَأَدَعُهَا‏.‏
Narrated Jabir:(Once) the Prophet (ﷺ) said, "Have you got carpets?" I replied, "Whence can we get carpets?" He said, "But you shall soon have carpets." I used to say to my wife, "Remove your carpets from my sight," but she would say, "Didn't the Prophet (ﷺ) tell you that you would soon have carpets?" So I would give up my request

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।