حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْجُعْفِيُّ، عَنْ أَبِي مُوسَى، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَخْرَجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ذَاتَ يَوْمٍ الْحَسَنَ فَصَعِدَ بِهِ عَلَى الْمِنْبَرِ، فَقَالَ " ابْنِي هَذَا سَيِّدٌ، وَلَعَلَّ اللَّهَ أَنْ يُصْلِحَ بِهِ بَيْنَ فِئَتَيْنِ مِنَ الْمُسْلِمِينَ ".
Narrated Abu Bakra:Once the Prophet (ﷺ) brought out Al-Hasan and took him up the pulpit along with him and said, "This son of mine is a Saiyid (i.e. chief) and I hope that Allah will help him bring about reconciliation between two Muslim groups
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।