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सहीह बुख़ारी

नंबर 3599

नंबर 3599किताब 61, नंबर 107
وَعَنِ الزُّهْرِيِّ، حَدَّثَتْنِي هِنْدُ بِنْتُ الْحَارِثِ، أَنَّ أُمَّ سَلَمَةَ، قَالَتِ اسْتَيْقَظَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ سُبْحَانَ اللَّهِ، مَاذَا أُنْزِلَ مِنَ الْخَزَائِنِ وَمَاذَا أُنْزِلَ مِنَ الْفِتَنِ ‏"‏‏.‏
Um Salama said:The Prophet (ﷺ) woke up and said, "Glorified be Allah: What great (how many) treasures have been sent down, and what great (how many ) afflictions have been sent down

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।