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सहीह बुख़ारी

नंबर 3597

नंबर 3597किताब 61, नंबर 105
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ أُسَامَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ أَشْرَفَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَى أُطُمٍ مِنَ الآطَامِ، فَقَالَ ‏ "‏ هَلْ تَرَوْنَ مَا أَرَى إِنِّي أَرَى الْفِتَنَ تَقَعُ خِلاَلَ بُيُوتِكُمْ مَوَاقِعَ الْقَطْرِ ‏"‏‏.‏
Narrated Usama:Once the Prophet (ﷺ) stood on one of the high buildings (of Medina) and said, "Do you see what I see? I see affliction pouring among your houses like raindrops

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।