حَدَّثَنِي يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنْ هَمَّامٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " لاَ تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى تُقَاتِلُوا خُوزًا وَكَرْمَانَ مِنَ الأَعَاجِمِ، حُمْرَ الْوُجُوهِ، فُطْسَ الأُنُوفِ، صِغَارَ الأَعْيُنِ، وُجُوهُهُمُ الْمَجَانُّ الْمُطْرَقَةُ، نِعَالُهُمُ الشَّعَرُ ". تَابَعَهُ غَيْرُهُ عَنْ عَبْدِ الرَّزَّاقِ.
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "The Hour will not be established till you fight with the Khudh and the Kirman from among the non-Arabs. They will be of red faces, flat noses and small eyes; their faces will look like flat shields, and their shoes will be of hair
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।