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सहीह बुख़ारी

नंबर 3564

नंबर 3564किताब 61, नंबर 74
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ مُضَرَ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَالِكٍ ابْنِ بُحَيْنَةَ الأَسْدِيِّ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا سَجَدَ فَرَّجَ بَيْنَ يَدَيْهِ حَتَّى نَرَى إِبْطَيْهِ‏.‏ قَالَ وَقَالَ ابْنُ بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا بَكْرٌ بَيَاضَ إِبْطَيْهِ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Malik bin Buhaina Al-Asdi:When the Prophet (ﷺ) prostrated, he used to keep his arms so widely apart that we used to see his armpits. (The sub-narrator, Ibn Bukair said, "The whiteness of his armpits)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।