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सहीह बुख़ारी

नंबर 3552

नंबर 3552किताब 61, नंबर 61
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، قَالَ سُئِلَ الْبَرَاءُ أَكَانَ وَجْهُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِثْلَ السَّيْفِ قَالَ لاَ بَلْ مِثْلَ الْقَمَرِ‏.‏
Narrated Abu 'Is-haq:Al-Bara' was asked, "Was the face of the Prophet (as bright) as a sword?" He said, "No, but (as bright) as a moon

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।