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सहीह बुख़ारी

नंबर 3542

नंबर 3542किताब 61, नंबर 51
حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ أَبِي حُسَيْنٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ الْحَارِثِ، قَالَ صَلَّى أَبُو بَكْرٍ ـ رضى الله عنه ـ الْعَصْرَ، ثُمَّ خَرَجَ يَمْشِي فَرَأَى الْحَسَنَ يَلْعَبُ مَعَ الصِّبْيَانِ، فَحَمَلَهُ عَلَى عَاتِقِهِ وَقَالَ بِأَبِي شَبِيهٌ بِالنَّبِيِّ لاَ شَبِيهٌ بِعَلِيٍّ‏.‏ وَعَلِيٌّ يَضْحَكُ‏.‏
Narrated `Uqba bin Al-Harith:(Once) Abu Bakr offered the `Asr prayer and then went out walking and saw Al-Hasan playing with the boys. He lifted him on to his shoulders and said, " Let my parents be sacrificed for your sake! (You) resemble the Prophet (ﷺ) and not `Ali," while `Ali was smiling

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।