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सहीह बुख़ारी

नंबर 3534

नंबर 3534किताब 61, नंबर 43
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ، حَدَّثَنَا سَلِيمٌ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مِينَاءَ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَثَلِي وَمَثَلُ الأَنْبِيَاءِ كَرَجُلٍ بَنَى دَارًا فَأَكْمَلَهَا وَأَحْسَنَهَا، إِلاَّ مَوْضِعَ لَبِنَةٍ، فَجَعَلَ النَّاسُ يَدْخُلُونَهَا وَيَتَعَجَّبُونَ، وَيَقُولُونَ لَوْلاَ مَوْضِعُ اللَّبِنَةِ ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:The Prophet (ﷺ) said, "My similitude in comparison with the other prophets is that of a man who has built a house completely and excellently except for a place of one brick. When the people enter the house, they admire its beauty and say: 'But for the place of this brick (how splendid the house will be)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।