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सहीह बुख़ारी

नंबर 3525

नंबर 3525किताब 61, नंबर 35
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُرَّةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏وَأَنْذِرْ عَشِيرَتَكَ الأَقْرَبِينَ‏}‏ جَعَلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُنَادِي ‏"‏ يَا بَنِي فِهْرٍ، يَا بَنِي عَدِيٍّ لِبُطُونِ قُرَيْشٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:When the Verse:-- 'And warn your tribe of near kindred.' (26.214) was revealed, the Prophet (ﷺ) started calling (the 'Arab tribes), "O Bani Fihr, O Bani `Adi" mentioning first the various branch tribes of Quraish

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।