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सहीह बुख़ारी

नंबर 3509

नंबर 3509किताब 61, नंबर 19
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَيَّاشٍ، حَدَّثَنَا حَرِيزٌ، قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ النَّصْرِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ وَاثِلَةَ بْنَ الأَسْقَعِ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ مِنْ أَعْظَمِ الْفِرَى أَنْ يَدَّعِيَ الرَّجُلُ إِلَى غَيْرِ أَبِيهِ، أَوْ يُرِيَ عَيْنَهُ مَا لَمْ تَرَ، أَوْ يَقُولُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَا لَمْ يَقُلْ ‏"‏‏.‏
Narrated Wathila bin Al-Asqa:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Verily, one of the worst lies is to claim falsely to be the son of someone other than one's real father, or to claim to have had a dream one has not had, or to attribute to me what I have not said

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 61 · Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।