सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 3480

नंबर 3480किताब 60, नंबर 147
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ كَانَ الرَّجُلُ يُدَايِنُ النَّاسَ، فَكَانَ يَقُولُ لِفَتَاهُ إِذَا أَتَيْتَ مُعْسِرًا فَتَجَاوَزْ عَنْهُ، لَعَلَّ اللَّهُ أَنْ يَتَجَاوَزَ عَنَّا‏.‏ قَالَ فَلَقِيَ اللَّهَ فَتَجَاوَزَ عَنْهُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "A man used to give loans to the people and used to say to his servant, 'If the debtor is poor, forgive him, so that Allah may forgive us.' So when he met Allah (after his death), Allah forgave him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 60 · Prophets

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।