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सहीह बुख़ारी

नंबर 3460

नंबर 3460किताब 60, नंबर 127
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ ـ رضى الله عنه ـ يَقُولُ قَاتَلَ اللَّهُ فُلاَنًا، أَلَمْ يَعْلَمْ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَعَنَ اللَّهُ الْيَهُودَ، حُرِّمَتْ عَلَيْهِمُ الشُّحُومُ، فَجَمَّلُوهَا فَبَاعُوهَا ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ جَابِرٌ وَأَبُو هُرَيْرَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:I heard `Umar saying, "May Allah Curse so-and-so! Doesn't he know that the Prophet (ﷺ) said, 'May Allah curse the Jews for, though they were forbidden (to eat) fat, they liquefied it and sold it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 60 · Prophets

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।