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सहीह बुख़ारी

नंबर 3458

नंबर 3458किताब 60, नंबर 125
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي الضُّحَى، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها كَانَتْ تَكْرَهُ أَنْ يَجْعَلَ ‏{‏الْمُصَلِّي‏}‏ يَدَهُ فِي خَاصِرَتِهِ وَتَقُولُ إِنَّ الْيَهُودَ تَفْعَلُهُ‏.‏ تَابَعَهُ شُعْبَةُ عَنِ الأَعْمَشِ‏.‏
Narrated `Aisha:That she used to hate that one should keep his hands on his flanks while praying. She said that the Jews used to do so

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 60 · Prophets

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।