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सहीह बुख़ारी

नंबर 3410

नंबर 3410किताब 60, नंबर 83
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا حُصَيْنُ بْنُ نُمَيْرٍ، عَنْ حُصَيْنِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ خَرَجَ عَلَيْنَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَوْمًا قَالَ ‏ "‏ عُرِضَتْ عَلَىَّ الأُمَمُ، وَرَأَيْتُ سَوَادًا كَثِيرًا سَدَّ الأُفُقَ فَقِيلَ هَذَا مُوسَى فِي قَوْمِهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:The Prophet (ﷺ) once came to us and said, "All the nations were displayed in front of me, and I saw a large multitude of people covering the horizon. Somebody said, 'This is Moses and his followers

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 60 · Prophets

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।