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सहीह बुख़ारी

नंबर 3406

नंबर 3406किताब 60, नंबर 79
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، أَنَّ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَجْنِي الْكَبَاثَ، وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ عَلَيْكُمْ بِالأَسْوَدِ مِنْهُ، فَإِنَّهُ أَطْيَبُهُ ‏"‏‏.‏ قَالُوا أَكُنْتَ تَرْعَى الْغَنَمَ قَالَ ‏"‏ وَهَلْ مِنْ نَبِيٍّ إِلاَّ وَقَدْ رَعَاهَا ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:We were with Allah's Messenger (ﷺ) picking the fruits of the 'Arak trees, and Allah's Messenger (ﷺ) said, "Pick the black fruit, for it is the best." The companions asked, "Were you a shepherd?" He replied, "There was no prophet who was not a shepherd

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 60 · Prophets

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।