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सहीह बुख़ारी

नंबर 3367

नंबर 3367किताब 60, नंबर 41
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو، مَوْلَى الْمُطَّلِبِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم طَلَعَ لَهُ أُحُدٌ فَقَالَ ‏ "‏ هَذَا جَبَلٌ يُحِبُّنَا وَنُحِبُّهُ، اللَّهُمَّ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ حَرَّمَ مَكَّةَ، وَإِنِّي أُحَرِّمُ مَا بَيْنَ لاَبَتَيْهَا ‏"‏‏.‏ رَوَاهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Anas bin Malik:When the mountain of Uhud came in the sight of Allah's Messenger (ﷺ) he said. "This is a mountain that loves us and is loved by us. O Allah! Abraham made Mecca a sanctuary, and I make (the area) in between these two mountains (of Medina) a sanctuary

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 60 · Prophets

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।