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सहीह बुख़ारी

नंबर 3247

नंबर 3247किताब 59, नंबर 58
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ الْمُقَدَّمِيُّ، حَدَّثَنَا فُضَيْلُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَيَدْخُلَنَّ مِنْ أُمَّتِي سَبْعُونَ أَلْفًا ـ أَوْ سَبْعُمِائَةِ أَلْفٍ ـ لاَ يَدْخُلُ أَوَّلُهُمْ حَتَّى يَدْخُلَ آخِرُهُمْ، وَجُوهُهُمْ عَلَى صُورَةِ الْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ ‏"‏‏.‏
Narrated Sahl bin Sa`d:The Prophet (ﷺ) said, "Verily! 70,000 or 700,000 of my followers will enter Paradise altogether; so that the first and the last amongst them will enter at the same time, and their faces will be glittering like the bright full moon

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 59 · Beginning of Creation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।