सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 3244

नंबर 3244किताब 59, नंबर 55
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ قَالَ اللَّهُ أَعْدَدْتُ لِعِبَادِي الصَّالِحِينَ مَا لاَ عَيْنَ رَأَتْ، وَلاَ أُذُنَ سَمِعَتْ، وَلاَ خَطَرَ عَلَى قَلْبِ بَشَرٍ، فَاقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ ‏{‏فَلاَ تَعْلَمُ نَفْسٌ مَا أُخْفِيَ لَهُمْ مِنْ قُرَّةِ أَعْيُنٍ ‏}‏‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Allah said, "I have prepared for My Pious slaves things which have never been seen by an eye, or heard by an ear, or imagined by a human being." If you wish, you can recite this Verse from the Holy Qur'an:--"No soul knows what is kept hidden for them, of joy as a reward for what they used to do

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 59 · Beginning of Creation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।