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सहीह बुख़ारी

नंबर 3174

नंबर 3174किताब 58, नंबर 16
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ، أَخْبَرَهُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا سُفْيَانَ بْنَ حَرْبٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ هِرَقْلَ أَرْسَلَ إِلَيْهِ فِي رَكْبٍ مِنْ قُرَيْشٍ كَانُوا تِجَارًا بِالشَّأْمِ فِي الْمُدَّةِ الَّتِي مَادَّ فِيهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَبَا سُفْيَانَ فِي كُفَّارِ قُرَيْشٍ‏.‏
Narrated ' `Abdullah bin `Abbas:That Abu Sufyan bin Harb Informed him that Heraclius called him and the members of a caravan from Quraish who had gone to Sham as traders, during the truce which Allah's Messenger (ﷺ) had concluded with Abu Sufyan and the Quraish infidels

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 58 · Jizyah and Mawaada'ah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।