حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلاَلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كُنَّا مُحَاصِرِينَ قَصْرَ خَيْبَرَ، فَرَمَى إِنْسَانٌ بِجِرَابٍ فِيهِ شَحْمٌ، فَنَزَوْتُ لآخُذَهُ، فَالْتَفَتُّ فَإِذَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَاسْتَحْيَيْتُ مِنْهُ.
Narrated `Abdullah bin Mughaffal:While we were besieging the fort of Khaibar, a person threw a leather container containing fat, and I ran to take it, but when I turned I saw the Prophet (standing behind), so I felt embarrassed in front of him
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।