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सहीह बुख़ारी

नंबर 3084

नंबर 3084किताब 56, नंबर 288
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا جُوَيْرِيَةُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا قَفَلَ كَبَّرَ ثَلاَثًا قَالَ ‏ "‏ آيِبُونَ إِنْ شَاءَ اللَّهُ تَائِبُونَ عَابِدُونَ حَامِدُونَ لِرَبِّنَا سَاجِدُونَ، صَدَقَ اللَّهُ وَعْدَهُ، وَنَصَرَ عَبْدَهُ، وَهَزَمَ الأَحْزَابَ وَحْدَهُ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah:When the Prophet (ﷺ) returned (from Jihad), he would say Takbir thrice and add, "We are returning, if Allah wishes, with repentance and worshipping and praising (our Lord) and prostrating ourselves before our Lord. Allah fulfilled His Promise and helped His Slave, and He Alone defeated the (infidel) clans

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।