सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 3080

नंबर 3080किताब 56, नंबर 284
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ عَمْرٌو وَابْنُ جُرَيْجٍ سَمِعْتُ عَطَاءً، يَقُولُ ذَهَبْتُ مَعَ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ إِلَى عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ وَهْىَ مُجَاوِرَةٌ بِثَبِيرٍ فَقَالَتْ لَنَا انْقَطَعَتِ الْهِجْرَةُ مُنْذُ فَتَحَ اللَّهُ عَلَى نَبِيِّهِ صلى الله عليه وسلم مَكَّةَ‏.‏
Narrated `Ata':I and 'Ubai bin `Umar went to `Aisha while she was staying near Thabir (i.e. a mountain). She said, "There is no Migration after Allah gave His Prophet victory over Mecca

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।