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सहीह बुख़ारी

नंबर 3070

नंबर 3070किताब 56, नंबर 275
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، أَخْبَرَنَا حَنْظَلَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ، أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ مِينَاءَ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ، ذَبَحْنَا بُهَيْمَةً لَنَا، وَطَحَنْتُ صَاعًا مِنْ شَعِيرٍ، فَتَعَالَ أَنْتَ وَنَفَرٌ، فَصَاحَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ يَا أَهْلَ الْخَنْدَقِ، إِنَّ جَابِرًا قَدْ صَنَعَ سُؤْرًا، فَحَىَّ هَلاً بِكُمْ ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:I said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! We have slaughtered a young sheep of ours and have ground one Sa of barley. So, I invite you along with some persons." So, the Prophet (ﷺ) said in a loud voice, "O the people of the Trench! Jabir has prepared "Sur" so come along

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।