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सहीह बुख़ारी

नंबर 3061

नंबर 3061किताब 56, नंबर 266
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ، إِنِّي كُتِبْتُ فِي غَزْوَةِ كَذَا وَكَذَا، وَامْرَأَتِي حَاجَّةٌ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ ارْجِعْ فَحُجَّ مَعَ امْرَأَتِكَ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:A man came to the Prophet (ﷺ) and said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! I have enlisted in the army for such-andsuch Ghazwa, and my wife is leaving for Hajj." Allah's Messenger (ﷺ) said, "Go back and perform Hajj with your wife

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।