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सहीह बुख़ारी

नंबर 3048

नंबर 3048किताब 56, नंबर 254
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي أُوَيْسٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رِجَالاً، مِنَ الأَنْصَارِ اسْتَأْذَنُوا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ ائْذَنْ فَلْنَتْرُكْ لاِبْنِ أُخْتِنَا عَبَّاسٍ فِدَاءَهُ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ لاَ تَدَعُونَ مِنْهَا دِرْهَمًا ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Some Ansari men asked permission from Allah's Messenger (ﷺ) saying, "O Allah's Messenger (ﷺ)! Allow us not to take the ransom of our nephew Al `Abbas. The Prophet (ﷺ) replied, "Do not leave a single Dirham thereof

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।