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सहीह बुख़ारी

नंबर 3032

नंबर 3032किताब 56, नंबर 239
حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ جَابِرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ مَنْ لِكَعْبِ بْنِ الأَشْرَفِ ‏"‏‏.‏ فَقَالَ مُحَمَّدُ بْنُ مَسْلَمَةَ أَتُحِبُّ أَنْ أَقْتُلَهُ قَالَ ‏"‏ نَعَمْ ‏"‏‏.‏ قَالَ فَأْذَنْ لِي فَأَقُولَ‏.‏ قَالَ ‏"‏ قَدْ فَعَلْتُ ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir:The Prophet (ﷺ) said, "Who is ready to kill Ka`b bin Ashraf (i.e. a Jew)." Muhammad bin Maslama replied, "Do you like me to kill him?" The Prophet (ﷺ) replied in the affirmative. Muhammad bin Maslama said, "Then allow me to say what I like." The Prophet (ﷺ) replied, "I do (i.e. allow you)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।