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सहीह बुख़ारी

नंबर 3017

नंबर 3017किताब 56, नंबर 226
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، أَنَّ عَلِيًّا ـ رضى الله عنه ـ حَرَّقَ قَوْمًا، فَبَلَغَ ابْنَ عَبَّاسٍ فَقَالَ لَوْ كُنْتُ أَنَا لَمْ أُحَرِّقْهُمْ، لأَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لاَ تُعَذِّبُوا بِعَذَابِ اللَّهِ ‏"‏‏.‏ وَلَقَتَلْتُهُمْ كَمَا قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَنْ بَدَّلَ دِينَهُ فَاقْتُلُوهُ ‏"‏‏.‏
इकरिमा से वर्णित है : अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने कुछ लोगों को आग में जला दिया, तो यह ख़बर जब इब्ने-ए-अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) को पहुंची तो उन्होंने कहा : अगर मैं होता तो उन्हें हरगिज़ न जलाता, क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "अल्लाह के अज़ाब (आग) से किसी को अज़ाब न दो।" मैं उनको क़त्ल करवा देता, जैसा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया है : "जो शख़्स अपना दीन बदल ले, उसे क़त्ल कर दो।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।