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सहीह बुख़ारी

नंबर 3001

नंबर 3001किताब 56, नंबर 210
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ سُمَىٍّ، مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ السَّفَرُ قِطْعَةٌ مِنَ الْعَذَابِ، يَمْنَعُ أَحَدَكُمْ نَوْمَهُ وَطَعَامَهُ وَشَرَابَهُ، فَإِذَا قَضَى أَحَدُكُمْ نَهْمَتَهُ فَلْيُعَجِّلْ إِلَى أَهْلِهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Journey is a piece of torture, for it disturbs one's sleep, eating and drinking. So, when you fulfill your job, you should hurry up to your family

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।