सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 2999

नंबर 2999किताब 56, नंबर 208
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ هِشَامٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي قَالَ، سُئِلَ أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ ـ رضى الله عنهما ـ كَانَ يَحْيَى يَقُولُ وَأَنَا أَسْمَعُ فَسَقَطَ عَنِّي ـ عَنْ مَسِيرِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ، قَالَ فَكَانَ يَسِيرُ الْعَنَقَ، فَإِذَا وَجَدَ فَجْوَةً نَصَّ‏.‏ وَالنَّصُّ فَوْقَ الْعَنَقِ‏.‏
Narrated Hisham's father:Usama bin Zaid was asked at what pace the Prophet (ﷺ) rode during Hajjat-ul-Wada`. He said, "He rode at a medium pace, but when he came upon an open way he would go at full pace

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।