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सहीह बुख़ारी

नंबर 2970

नंबर 2970किताब 56, नंबर 179
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ سَمِعْتُ مَالِكَ بْنَ أَنَسٍ، سَأَلَ زَيْدَ بْنَ أَسْلَمَ، فَقَالَ زَيْدٌ سَمِعْتُ أَبِي يَقُولُ، قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ ـ رضى الله عنه ـ حَمَلْتُ عَلَى فَرَسٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ، فَرَأَيْتُهُ يُبَاعُ، فَسَأَلْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم آشْتَرِيهِ فَقَالَ ‏ "‏ لاَ تَشْتَرِهِ، وَلاَ تَعُدْ فِي صَدَقَتِكَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Umar bin Al-Khattab:I gave a horse to be used in Allah's Cause, but later on I saw it being sold. I asked the Prophet (ﷺ) whether I could buy it. He said, "Don't buy it and don't take back your gift of charity

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।