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सहीह बुख़ारी

नंबर 2959

नंबर 2959किताब 56, नंबर 170
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ يَحْيَى، عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمَّا كَانَ زَمَنَ الْحَرَّةِ أَتَاهُ آتٍ فَقَالَ لَهُ إِنَّ ابْنَ حَنْظَلَةَ يُبَايِعُ النَّاسَ عَلَى الْمَوْتِ‏.‏ فَقَالَ لاَ أُبَايِعُ عَلَى هَذَا أَحَدًا بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated `Abdullah bin Zaid:that in the time (of the battle) of Al-Harra a person came to him and said, "Ibn Hanzala is taking the pledge of allegiance from the people for death." He said, "I will never give a pledge of allegiance for such a thing to anyone after Allah's Messenger (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।