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सहीह बुख़ारी

नंबर 2933

नंबर 2933किताब 56, नंबर 146
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ، أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ الأَحْزَابِ عَلَى الْمُشْرِكِينَ فَقَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ مُنْزِلَ الْكِتَابِ سَرِيعَ الْحِسَابِ، اللَّهُمَّ اهْزِمِ الأَحْزَابَ، اللَّهُمَّ اهْزِمْهُمْ وَزَلْزِلْهُمْ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin Abi `Aufa:Allah's Messenger (ﷺ) invoked evil upon the pagans on the ay (of the battle) of Al-Ahzab, saying, "O Allah! The Revealer of the Holy Book, the Swift-Taker of Accounts, O Allah, defeat Al-Ahzab (i.e. the clans), O Allah, defeat them and shake them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।