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सहीह बुख़ारी

नंबर 2912

नंबर 2912किताब 56, नंबर 125
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَبَّاسٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، قَالَ مَا تَرَكَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِلاَّ سِلاَحَهُ وَبَغْلَةً بَيْضَاءَ وَأَرْضًا جَعَلَهَا صَدَقَةً‏.‏
Narrated `Amr bin Al-Harith:The Prophet (ﷺ) did not leave behind him after his death, anything except his arms, his white mule, and a piece of land at Khaibar which he left to be given in charity

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।