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सहीह बुख़ारी

नंबर 2909

नंबर 2909किताब 56, नंबर 122
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا الأَوْزَاعِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ بْنَ حَبِيبٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا أُمَامَةَ، يَقُولُ لَقَدْ فَتَحَ الْفُتُوحَ قَوْمٌ مَا كَانَتْ حِلْيَةُ سُيُوفِهِمِ الذَّهَبَ وَلاَ الْفِضَّةَ، إِنَّمَا كَانَتْ حِلْيَتُهُمُ الْعَلاَبِيَّ وَالآنُكَ وَالْحَدِيدَ‏.‏
Narrated Abu Umama:Some people conquered many countries and their swords were decorated neither with gold nor silver, but they were decorated with leather, lead and iron

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।