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सहीह बुख़ारी

नंबर 2885

नंबर 2885किताब 56, नंबर 100
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ خَلِيلٍ، أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ، قَالَ سَمِعْتُ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ تَقُولُ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم سَهِرَ فَلَمَّا قَدِمَ الْمَدِينَةَ قَالَ ‏"‏ لَيْتَ رَجُلاً مِنْ أَصْحَابِي صَالِحًا يَحْرُسُنِي اللَّيْلَةَ ‏"‏‏.‏ إِذْ سَمِعْنَا صَوْتَ سِلاَحٍ فَقَالَ ‏"‏ مَنْ هَذَا ‏"‏‏.‏ فَقَالَ أَنَا سَعْدُ بْنُ أَبِي وَقَّاصٍ، جِئْتُ لأَحْرُسَكَ‏.‏ وَنَامَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) was vigilant one night and when he reached Medina, he said, "Would that a pious man from my companions guard me tonight!" Suddenly we heard the clatter of arms. He said, "Who is that? " He (The new comer) replied, " I am Sa`d bin Abi Waqqas and have come to guard you." So, the Prophet (ﷺ) slept (that night)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।