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सहीह बुख़ारी

नंबर 2883

नंबर 2883किताब 56, नंबर 98
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، عَنْ خَالِدِ بْنِ ذَكْوَانَ، عَنِ الرُّبَيِّعِ بِنْتِ مُعَوِّذٍ، قَالَتْ كُنَّا نَغْزُو مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَنَسْقِي الْقَوْمَ وَنَخْدُمُهُمْ، وَنَرُدُّ الْجَرْحَى وَالْقَتْلَى إِلَى الْمَدِينَةِ‏.‏
Narrated Ar-Rubai' bint Mu'auwidh:We used to take part in holy battles with the Prophet (ﷺ) by providing the people with water and serving them and bringing the killed and the wounded back to Medina

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।