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सहीह बुख़ारी

नंबर 2873

नंबर 2873किताब 56, नंबर 89
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو إِسْحَاقَ، قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَو بْنَ الْحَارِثِ، قَالَ مَا تَرَكَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِلاَّ بَغْلَتَهُ الْبَيْضَاءَ وَسِلاَحَهُ وَأَرْضًا تَرَكَهَا صَدَقَةً‏.‏
Narrated `Amr bin Al-Harith:The Prophet (ﷺ) did not leave anything behind him after his death except a white mule, his arms and a piece of land which he left to be given in charity

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · Fighting for the Cause of Allah (Jihaad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।